#8867 Get that splinter out from an eye!!!

The eyes are the window to the soul...

It is the time when you get irritated just because neither can it be removed, nor can it be absorbed.

Yes, here I am making an effort of showing you the magnanimity of the smallest particle present. A splinter in the eye makes you feel exactly the same way and shows its stature. It reminds us about the importance of ‘space’ and ‘time’.

A splinter is nothing if it’s just a splinter but as soon as it becomes ‘a splinter in an eye’ creates havoc. You trying to pick it out for very long and finally after some continuous efforts succeeded in plucking it out for some relief.

Is it just a relief to have it out, or simply “amazing?” 🙂

उस समय आपको बहुत चिडचिडापन महसूस होता है जब आप किसी ऐसी स्थिति में हों जहाँ उस चीज़ को ना ही आप बाहर निकाल सकते हों और ना ही उससे अन्दर दबा सकते हों.

जी हाँ, मैं यहाँ आपको किसी भी एक छोटी सी चीज़ की महत्वता बताने का प्रयास कर रहा हूँ. मान लीजिये के आपके आँख में कोई एक तिनका चला गया है, शायद तब आपको उस छोटे से तिनके की उदारता के बारे में अनुभव होगा. शायद इस वाख्या से आपको अंतरिक्ष समय की महत्वपूर्णता समझ में आएगी.

एक तिनका जब तक आँख से बहार रहता है तब तक सिर्फ एक तिनका ही कहलाता है, परन्तु जैसे ही वो किसी की आँख में प्रवेश कर लेता है तो हाहाकार मच जाता है. मान लीजिये की काफी समय से प्रयास करने के बाद भी वो तिनका बहार न निकल पा रहा हो और फिर अचानक से आप उससे निकालने में सफल हो जाएँ.

क्या ऐसा होने पर आपको रहत नहीं मिलेगी, और क्या सिर्फ रहत मिलेगी या आपको एक दम “अद्भुत” लगेगा 🙂

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