#8869 Ever smelled a book???

Light Reading
Bet, most of you have read the books but not many would have smelled it!!!

I am a vivid reader and fond of almost all kinds of books. I am gifted a kindle (e-book reader) recently and tried to get used to the features of it by reading lot on it. Even after finishing quite a few books on it, I felt that something is missing in the whole experience of reading.

In fact, I tried to find out the reason for that incompleteness and vacuum, but could not arrive to a solution. I read and read on the kindle to find out the exact rationale for that emptiness, but remained empty handed.
After few days, I started to read another book but this time the actual hard copy of my favorite author. Even before completing the first 2 pages, I got my long awaited answer.

It was the smell of that fresh book which was missing while reading it on kindle, and I came to conclusion that technology could never replace these little but invaluable experiences.

And, since then I am addicted to this smell, which always makes me feel “amazing” 🙂

मैं दावा कर सकता हूँ की आप लोगों ने किताबें तो कभी न कभी ज़रूर पड़ी होगी, पर शायद ही कभी उसकी खुशबू को महसूस किया होगा.

मैं किताबें बहुत पढता हूँ और लगभग सभी प्रकार की किताबों में मेरी रूचि रहती है. अभी अभी मुझे गिफ्ट की तौर पर एक kindle (e-book reader) दीया गया, और मैंने उसके बारे में जल्दी से जान ने के लिए बहुत किताबें पढ़ी. लेकिन इतनी किताबें पढने के बाद भी मुझे कुछ कमी सी महसूस हुई.

जहाँ तक मैंने इस कमी का कारण जानने के लिए बहुत कोशिश की परन्तु फिर भी कोई कारण पता नहीं चला. मैंने kindle पर और भी खूब किताबें पढ़ी लेकिन मुझे कुछ भी समझ नहीं आया, और हमेशा बस कुछ कमी ही महसूस होती रही.
लेकिन कुछ दिन बाद मैंने एक किताब पढना शुरू किया, पर इस बार कागज़ की किताब और वो भी मेरे सबसे पसंदीदा लेखक की. और मुझे २ पेज पढने से पहले ही अपना बहुत दिन से तलाश में रहा उत्तर मिल गया था.

मेरा उत्तर था किताब के कागज़ की वो खुशबू जो उस kindle में दूर दूर तक मौजूद नहीं थी. मुझे समझ में आ गया था की technology कितना भी आगे निकल जाए पर कभी भी इस तरह के अमूल्य अनुभवों की बराबरी नहीं कर सकती.

और उस दिन के बाद से मैं उस खुशबू का आदि हो गया, जो हमेशा मुझे “अचंभित” कर देती है 🙂


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